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“हम अपना महल यहाँ बनाएँगे।”
“पर भाई, यहाँ पानी आएगा तो महल बह जाएगा।”
“अरे हम पानी पे ही तो महल बना रहे हैं।”
“पानी पे महल!”
“और नहीं तो क्या। हमारा महल पानी के बीच होगा। सबसे अलग, सबसे अनोखा।”
“पर अगर महल बह गया तो?”
“और अगर नहीं बहा तो? अरे तू ज्यादा सोच मत। अगर बह गया तो हम फिर से दूसरा बना लेंगे।”
“और अगर नहीं बहा तो हमारा महल सबसे अनोखा होगा ना?”
“हाँ, सबसे अनोखा, सबसे सुन्दर।”
“पर बह गया तो कितनी मेहनत बेकार हो जाएगी।”
“अरे जब तक बनायेंगे नहीं तो पता कैसे चलेगा।”

2 thoughts on “Hauslein

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