ख़लिश

एक वक़्त था जब किसी का गम जीया था हमने,
आज अपनी खुशी में पराया कर दिया है हमको.
उनकी आँखों से जो अश्क छलके भी ना थे,
उन्हे अपनी आँखों में समाया था हमने.
हमने सोचा था वो हमारी किस्मत हैं,
और इसलिए उनके हाथों की लकीरों में अपना नसीब ढूँढते थे,
हाथ वो छुड़ा गये इस तरह,
की मेरी लकीरें भी साथ ले गये
अब वीरान है ये हथेलियाँ ,
और आँखों से अश्क उनके बहते हैं.